दिल्ली की एक अदालत ने कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े करीब दस साल पुराने मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कंपनी, उसके पूर्व अध्यक्ष एस. के. तमोतिया और पूर्व महाप्रबंधक पीआरएस मणि को आरोपों से मुक्त कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। न्यायालय ने कहा कि किसी आपराधिक साजिश या गैरकानूनी गतिविधि के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं। अदालत के अनुसार, जांच एजेंसी CBI अपने आरोपों को साबित करने में असफल रही। फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने माना कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे आपराधिक मंशा सिद्ध हो सके। इस आधार पर सभी आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया। मामला देश में कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद से जुड़े प्रमुख मामलों में से एक था। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बाद यह निर्णय आया है। फैसले के साथ इस प्रकरण का न्यायिक अध्याय लगभग समाप्त हो गया है। अदालत के निर्णय को कंपनी और संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है।
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