सुप्रीम कोर्ट ने IPS अधिकारी अब्दुर रहमान की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) याचिका खारिज करने के गृह मंत्रालय के फैसले को निरस्त कर दिया है। अदालत ने मंत्रालय को मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। अब्दुर रहमान ने वर्ष 2019 में VRS के लिए आवेदन किया था। उनके खिलाफ यातना और बिना अनुमति दूसरी शादी सहित कई आरोपों से जुड़े मामले लंबित हैं। गृह मंत्रालय ने इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए उनकी याचिका अस्वीकार कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का निष्पक्ष और व्यापक पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है। अदालत ने बाद में दाखिल की गई चार्जशीटों को भी ध्यान में रखने को कहा। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार अनुशासनात्मक कार्यवाही को समय पर पूरा नहीं कर सकी। इस स्थिति को VRS आवेदन पर निर्णय लेते समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मंत्रालय से सभी प्रासंगिक तथ्यों की समीक्षा करने को कहा है। फैसले में किसी आरोप की सत्यता पर अंतिम टिप्पणी नहीं की गई है। अब गृह मंत्रालय को कानून और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर नया निर्णय लेना होगा।
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