वोलबैकिया एक प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली बैक्टीरिया है, जिसका उपयोग दुनिया भर में डेंगू, मलेरिया और जीका जैसे मच्छर जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। यह बैक्टीरिया मच्छरों के अंदर रहती है और वायरस को बढ़ने से रोकती है, जिससे बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की क्षमता कम हो जाती है। गूगल की सहायता से चल रही परियोजना के तहत 3.2 करोड़ वोलबैकिया-संक्रमित मच्छरों को विभिन्न देशों में छोड़ा जा चुका है। यह विधि पर्यावरण के अनुकूल है और कीटनाशकों के विकल्प के रूप में कारगर साबित हो रही है। ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और भारत में किए गए ट्रायल में डेंगू के मामलों में 77% तक की कमी देखी गई है। वोलबैकिया मच्छरों के प्रजनन को भी प्रभावित करता है, जिससे धीरे-धीरे पूरी आबादी रोग-प्रतिरोधी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ एक बड़ा हथियार साबित हो सकती है।
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