एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार भारत आत्म-रोज़गार (self-employment) की इच्छा के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है, जहां लगभग 90% लोग अपना खुद का बॉस बनना पसंद करते हैं। स्वतंत्रता और लचीले कार्य जीवन को इसके प्रमुख कारणों में बताया गया है। हालांकि, वित्तीय अनिश्चितता और सोशल मीडिया पर दिखने वाली ‘ग्लैमरस’ उद्यमिता की छवि कई लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार कई युवा स्थिर नौकरी के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करने की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन शुरुआती पूंजी और सही मार्गदर्शन की कमी एक बड़ी बाधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मजबूत इकोसिस्टम की जरूरत है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। अध्ययन यह भी दिखाता है कि आत्मनिर्भर बनने की चाह बढ़ रही है। हालांकि जोखिम और असफलता का डर अभी भी बना हुआ है। रिपोर्ट सुझाव देती है कि स्किल डेवलपमेंट और फाइनेंशियल सपोर्ट बढ़ाने की आवश्यकता है। आने वाले वर्षों में यह ट्रेंड और तेज हो सकता है।
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