केरल के रहने वाले शबिन शाजी को ब्रिटेन की एक अदालत से बड़ी राहत मिली है। एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें 30,000 पाउंड यानी लगभग 38.4 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाजी को एक केयर एजेंसी हेल्थकेयर वीजा पर ब्रिटेन लेकर गई थी। हालांकि वहां पहुंचने के बाद उन्हें एक दिन का भी काम नहीं दिया गया। एजेंसी ने उन्हें कोई वेतन भी नहीं दिया। ब्रिटेन जाने और वीजा हासिल करने के लिए शाजी ने करीब 17,000 पाउंड खर्च किए थे। काम और आय न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। जीवित रहने के लिए उन्हें चैरिटी और दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान एजेंसी की गंभीर लापरवाही सामने आई। ट्रिब्यूनल ने माना कि कर्मचारी के साथ अन्याय हुआ है। इसके बाद शाजी के पक्ष में मुआवजे का आदेश जारी किया गया। संबंधित केयर एजेंसी का स्पॉन्सरशिप लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। यह मामला विदेशी कर्मचारियों के शोषण और रोजगार नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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