महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुटों के पुनर्मिलन की चर्चा तेज हो गई है। करीब चार साल पहले पार्टी उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे खेमों में बंट गई थी। अब दोनों पक्षों के कुछ नेताओं का मानना है कि राज्य में बीजेपी का बढ़ता प्रभाव क्षेत्रीय दलों के लिए चुनौती बन रहा है। नेताओं के अनुसार, बीजेपी की मजबूत स्थिति सहयोगी दलों की राजनीतिक जमीन कमजोर कर सकती है। इसी वजह से शिवसेना के दोनों गुटों में एकता की मांग बढ़ रही है। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे समर्थकों के बीच इस विषय पर चर्चा होने लगी है। कई नेताओं का मानना है कि पार्टी की पुरानी ताकत वापस पाने के लिए एकजुट होना जरूरी है। कुछ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि शिंदे सहमत होते हैं तो पुनर्मिलन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है। राजनीतिक पर्यवेक्षक भी इस संभावना पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। दोनों गुटों के बीच मतभेद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। इसके बावजूद साझा राजनीतिक हितों के कारण संवाद की संभावनाएं बढ़ती दिख रही हैं। संभावित एकता महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है।
Source: Source