प्रथम विश्व युद्ध (WWI) के बाद की अनकही कहानी में अब वे अमेरिकी महिलाएं सामने आई हैं, जिन्होंने फ्रांस के 300,000 अनाथ बच्चों की मां बनने के लिए हजारों मील का सफर तय किया। युद्ध में लाखों सैनिक मारे गए थे, जिससे फ्रांस के गांवों में बच्चे अनाथ हो गए थे। सन 1919-1924 के बीच, अमेरिकी रेड क्रॉस और स्वयंसेवी महिलाओं ने ‘मदरिंग प्रोजेक्ट’ चलाया। इन महिलाओं ने न सिर्फ बच्चों को पाला, बल्कि उन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी मुहैया कराईं। कई महिलाओं ने अपनी पूरी जिंदगी फ्रांस में ही बिता दी। इस पहल को आज ‘लैंगरैक प्लान’ के नाम से जाना जाता है। यह युद्ध के बाद की पुनर्निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा था। उनका बलिदान और मातृत्व का यह स्नेह इतिहास के पन्नों में दर्ज तो नहीं था, लेकिन इसने हजारों बच्चों की जिंदगी बदल दी। यह मानवता और अमेरिकी-फ्रांसीसी मैत्री का अभूतपूर्व उदाहरण है।
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