छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में हर दूसरा छात्र अपनी कमाई से पढ़ाई कर रहा है। विश्वविद्यालय के 36 विभागों में 12,500 छात्र अध्ययनरत हैं। करीब 1,000 से अधिक छात्र अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी उठा रहे हैं। 700 छात्र 500 जरूरतमंद साथियों की फीस जमा कर रहे हैं। यह बदलाव कोरोना काल के बाद कुलपति आलोक चक्रवाल की ‘स्वावलंबी छत्तीसगढ़’ योजना से आया। इस योजना के तहत विश्वविद्यालय के सभी टेंडर, ई-रिक्शा संचालन, फोटोग्राफी, कैंटीन और बेकरी का काम छात्रों को दिया गया। 2022 में शुरू हुए स्टार्टअप्स की संख्या अब 56 हो गई है। छात्र अर्पित चौहान ने ‘अर्की’ नाम से ई-बाइक बनाई है, जिसके 1,200 ऑर्डर मिल चुके हैं। इस यूनिट में 25 छात्र 15 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहे हैं। छात्र अभिजित त्रिपाठी की प्रीजर सॉफ्टवेयर कंपनी का सालाना टर्नओवर 8 करोड़ रुपए है। उन्होंने चैटजीपीटी जैसा ‘डीप क्वेरी’ सॉफ्टवेयर बनाया है। छात्रों के उत्पाद अब अमेजन और फ्लिपकार्ट पर बिक रहे हैं। रूरल टेक्नोलॉजी विभाग के 300 छात्र मिलकर लाखों का गुलाल, अचार और राखी बेचते हैं। नए छात्र आते ही अपना काम शुरू करके अपना खर्चा निकाल रहे हैं। विश्वविद्यालय छात्रों को संसाधन, जगह और मार्गदर्शन मुफ्त उपलब्ध कराता है। इस पहल से शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता का अनूठा मॉडल तैयार हुआ है।
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