कांगो में इबोला वायरस फिर से तेजी से फैल रहा है, जिससे कई लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों ने इस प्रकोप के पीछे जंगली जानवरों के सेवन (बुशमीट) को एक बड़ा कारण बताया है। अध्ययनों से पता चलता है कि वायरस चमगादड़, बंदर और अन्य जंगली जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। स्थानीय समुदायों में भोजन की कमी और पारंपरिक आदतों के कारण जंगली मांस का सेवन आम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों को संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से बचने की सलाह दी है। डॉक्टरों के अनुसार, बिना पके या अधपके जंगली मांस के सेवन से संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। पिछले इबोला प्रकोपों में भी बुशमीट की खपत को एक बड़ा जोखिम कारक माना गया था। कांगो सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल जंगली जानवरों के शिकार और उनके मांस के व्यापार से बचें। स्वास्थ्यकर्मी ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चला रहे हैं, ताकि लोग वायरस के प्रसार को रोक सकें। वायरस के लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी और आंतरिक रक्तस्राव शामिल हैं, जिससे मृत्यु दर काफी अधिक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रभावी टीके और इलाज नहीं आ जाते, तब तक जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखना ही सबसे अच्छा बचाव है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय संगठन कांगो को मेडिकल सप्लाई और विशेषज्ञ टीमें भेज रहे हैं।
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