दिल्ली सरकारी स्कूलों में 11वीं कक्षा में अंग्रेजी माध्यम की कक्षाओं को बंद किए जाने से छात्र मुश्किल में पड़ गए हैं। इस बदलाव के कारण छात्रों को या तो हिंदी माध्यम चुनना पड़ रहा है या फिर स्कूल बदलने को मजबूर होना पड़ रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि इससे छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन और आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कई छात्र अचानक माध्यम बदलने के कारण विषयों को समझने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और परीक्षा के परिणामों को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिक्षा कार्यकर्ताओं ने इस मामले की जांच की मांग की है ताकि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके और उन्हें समान अवसर मिल सकें। अभिभावकों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि अंग्रेजी माध्यम हटाने से उनके बच्चे अन्य निजी स्कूलों के छात्रों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। यह मामला अब शिक्षा विभाग के संज्ञान में है।
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