सद्गुरु ने कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों को दी जाने वाली सबसे बड़ी विरासत घर का भावनात्मक वातावरण होता है। बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं और उनकी भावनाओं को ग्रहण करते हैं। गुस्सा और निराशा जैसी नकारात्मक भावनाएं बच्चों पर बुरा असर डालती हैं। सद्गुरु ने चेतावनी दी कि माता-पिता अपनी चिंताओं को बच्चों के सामने कभी प्रकट न करें। इसके बजाय उन्हें खुशी, प्रेम और उत्साह का माहौल देना चाहिए। ऐसा वातावरण बच्चों में भावनात्मक ताकत और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है। माता-पिता का कर्तव्य बच्चों को जीवन को आनंद से जीने की कला सिखाना है। नकारात्मकता बच्चों के मानसिक विकास में बाधक बनती है। सद्गुरु ने कहा कि यही वह आदत है जिसे माता-पिता को कभी भी अपने बच्चों को नहीं देनी चाहिए। एक सकारात्मक घर ही सबसे मूल्यवान विरासत है।
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