प्रसिद्ध बंगाली फिल्म निर्माता नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने 25 साल की कहानी कहने की अपनी यात्रा पर बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में सिनेमा केवल फूल-पत्ती-घास यानी सतही और परंपरागत विषयों पर टिका नहीं रह सकता। उनका मानना है कि फिल्मों में जोखिम उठाना और सामाजिक यथार्थ से जुड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जड़ों से जुड़ा सिनेमा ही वैश्विक स्तर पर यात्रा कर सकता है। उनके अनुसार, अब दर्शक सार्थक और प्रासंगिक कहानियां चाहते हैं। उन्होंने अपनी आगामी फिल्मों के बारे में भी संकेत दिए, जो सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होंगी। इस जोड़ी ने अपने करियर में ‘पोस्तो’ और ‘बेले’ जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया है। उन्होंने कहा कि सिनेमा को समाज के बदलते परिवेश और सच्चाई को दिखाना चाहिए। उनका यह वक्तव्य फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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