एक नई वैज्ञानिक स्टडी में मच्छरों के व्यवहार को लेकर दिलचस्प जानकारी सामने आई है। शोध के अनुसार, मच्छर कुछ परिस्थितियों में रिपेलेंट की गंध को खतरे की बजाय भोजन से जोड़कर पहचानना सीख सकते हैं। अध्ययन में विशेष रूप से डीईईटी (DEET) आधारित रिपेलेंट पर ध्यान दिया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि यदि मच्छरों को भोजन करते समय डीईईटी की गंध का अनुभव होता है, तो वे उसके प्रति अलग प्रतिक्रिया विकसित कर सकते हैं। समय के साथ वे इस गंध को भोजन मिलने के संकेत के रूप में पहचानने लगते हैं। इससे रिपेलेंट की प्रभावशीलता कम हो सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मच्छरों में सीखने और अनुभव के आधार पर व्यवहार बदलने की क्षमता होती है। यही कारण है कि कुछ मामलों में मच्छर भगाने वाले उत्पाद अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाते। अध्ययन ने मच्छरों की अनुकूलन क्षमता को लेकर नई समझ विकसित की है। वैज्ञानिक अब अधिक प्रभावी और लंबे समय तक काम करने वाले रिपेलेंट विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। यह शोध मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय मच्छर नियंत्रण के कई तरीकों का उपयोग करना बेहतर हो सकता है।
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