विश्व शतरंज चैंपियन डी गुकेश की शानदार उपलब्धियों पर मैग्नस कार्लसन के पिता हेनरिक कार्लसन ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विश्व स्तर पर सफलता हासिल करना जितना गौरवपूर्ण होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। हेनरिक के अनुसार, 18 वर्ष की आयु में दुनिया की उम्मीदों का बोझ संभालना आसान नहीं होता। उन्होंने युवा शतरंज खिलाड़ियों पर पड़ने वाले मानसिक और भावनात्मक दबाव की ओर ध्यान दिलाया। उनका मानना है कि विश्व खिताब जीतने के बाद खिलाड़ियों से अपेक्षाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। हेनरिक ने गुकेश की स्थिति की तुलना अपने बेटे मैग्नस कार्लसन के शुरुआती करियर से भी की। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों की पृष्ठभूमि और परिस्थितियां काफी अलग हैं। गुकेश भारत जैसे शतरंज-प्रेमी देश से आते हैं, जहां उनके प्रति लोगों की अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं। वहीं मैग्नस ने नॉर्वे में अपेक्षाकृत अलग माहौल में अपना करियर बनाया। हेनरिक ने एक शतरंज दिग्गज के पिता के रूप में अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि परिवार का समर्थन ऐसे खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनका मानना है कि सफलता के साथ आने वाले दबाव को संतुलित करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गुकेश इस दौर को मजबूती से संभालते हुए आगे भी नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
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