ब्रिटेन में बढ़ती युवा बेरोजगारी को लेकर एक प्रमुख समीक्षा ने गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि देश एक संभावित ‘खोई हुई पीढ़ी’ के संकट का सामना कर सकता है। विशेष रूप से उन युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से बाहर होने के जोखिम में हैं। ऐसे युवाओं को अक्सर ‘नीट’ श्रेणी में रखा जाता है। इसी बीच मर्सीसाइड के एक बरो ने इस चुनौती से निपटने का अलग तरीका अपनाया है। वहां शुरुआती स्तर पर व्यक्तिगत सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इस मॉडल का उद्देश्य 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को जोखिम की स्थिति में पहुंचने से पहले ही सहयोग देना है। स्थानीय संस्थाएं छात्रों की जरूरतों और परिस्थितियों को समझकर विशेष हस्तक्षेप कर रही हैं। शिक्षा, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भी इस प्रयास का हिस्सा बनाया गया है। समर्थकों का मानना है कि समय रहते की गई मदद युवाओं को भविष्य की समस्याओं से बचा सकती है। यह पहल उन बच्चों को आत्मविश्वास और दिशा देने का प्रयास कर रही है जो पीछे छूटने के खतरे में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यक्तिगत और लक्षित सहायता पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। मर्सीसाइड का अनुभव अब अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। बढ़ती युवा बेरोजगारी के दौर में यह मॉडल संभावित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देता है।
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