भारत का मॉडल टेनेंसी एक्ट किरायेदारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और संतुलित बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस कानून के तहत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में सिक्योरिटी डिपॉजिट को अधिकतम दो महीने के किराए तक सीमित करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य किरायेदारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना है। कानून में यह भी अनिवार्य किया गया है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच लिखित एग्रीमेंट होना जरूरी है। इससे दोनों पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट होती हैं। एक्ट के अनुसार, सुरक्षा जमा राशि को समय पर वापस करना अनिवार्य है। किसी भी स्थिति में जरूरी सेवाओं जैसे बिजली और पानी को काटने पर रोक लगाई गई है। हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए राज्यों की सहमति जरूरी है। अब तक सभी राज्यों में इसे समान रूप से लागू नहीं किया गया है। इसलिए इसके प्रभाव में क्षेत्रीय स्तर पर अंतर देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिखित समझौता किरायेदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। यह कानून रेंटल मार्केट को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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