कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की वैश्विक दौड़ में चीन तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सस्ती और भरपूर बिजली चीन की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। AI मॉडल चलाने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटरों की जरूरत होती है, जिनमें भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है। चीन में अपेक्षाकृत कम लागत पर बिजली उपलब्ध होने से डेटा सेंटर संचालन आसान और सस्ता हो रहा है। यही कारण है कि चीन तेजी से AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर पा रहा है। अमेरिका और अन्य देशों की तुलना में ऊर्जा लागत कम होना चीन को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे रहा है। तकनीकी कंपनियां भी ऐसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं जहां ऊर्जा खर्च कम हो। AI तकनीक के विकास में ऊर्जा आपूर्ति अब अहम रणनीतिक कारक बन चुकी है। चीन सरकार भी डिजिटल और AI सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर समर्थन दे रही है। डेटा सेंटरों के विस्तार के साथ देश की तकनीकी क्षमता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI की प्रतिस्पर्धा केवल तकनीक नहीं बल्कि ऊर्जा संसाधनों पर भी निर्भर करेगी। चीन की यह रणनीति अमेरिका के लिए चुनौती मानी जा रही है। वैश्विक टेक कंपनियां भी ऊर्जा दक्षता और लागत पर विशेष ध्यान दे रही हैं। आने वाले वर्षों में AI सेक्टर में चीन और अमेरिका के बीच मुकाबला और तेज होने की संभावना है।
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