शहर में सीवेज के निस्तारण को लेकर विभिन्न प्राधिकरणों के बीच जिम्मेदारी का विवाद गहरा गया है। नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जल निगम एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि सीवेज का उचित प्रबंधन उनका काम नहीं है। इस वजह से कई इलाकों में कच्चा सीवेज सड़कों और नालियों में बह रहा है। स्थानीय निवासी बदबू और बीमारियों से परेशान हैं, लेकिन कोई अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहा है। एक अधिकारी का कहना है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की देखरेख दूसरे विभाग के अधीन है। दूसरा विभाग बताता है कि फंड की कमी के चलते वह कुछ नहीं कर सकता। इस गतिरोध के चलते लाखों लीटर सीवेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे जल स्रोत दूषित हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने पिछले मामले में सभी एजेंसियों को स्पष्ट जवाब देने को कहा था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि इससे हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। स्थानीय विधायक ने सीएम से हस्तक्षेप की मांग की है। अधिकारियों के बीच यह विवाद अब प्रशासनिक मुकदमेबाजी में तब्दील हो गया है। पर्यावरणविदों का कहना है कि जिम्मेदारी के झगड़े में अब और समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। फिलहाल, लोग विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं और न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करने की बात कह रहे हैं। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार एक स्पष्ट नीति बनाए और किसी एक नोडल एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपे।
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