महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और उनके पेमब्रोक वेल्श कोर्गी कुत्तों के बीच का गहरा और व्यक्तिगत रिश्ता उनके शासनकाल का प्रतीक बन गया। ये वफादार कुत्ते राजकाज की व्यस्तताओं से दूर महारानी को सादा स्नेह और जमीन से जुड़ाव का एहसास कराते थे। उनकी शरारतें और चंचल हरकतें महल के औपचारिक माहौल में एक राहत भरी अराजकता ले आती थीं। महारानी ने अपने जीवनकाल में 30 से अधिक कोर्गी पाले थे, जिनमें से कई दूसरे कोर्गी या डचशुंड के साथ मिले नस्ल के थे। कोर्गी महारानी के साथ आधिकारिक फोटोशूट से लेकर शाही यात्राओं तक में दिखे। उनकी मृत्यु के बाद, दो कोर्गी (म्यूिक और सैंडी) उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए थे। ये कुत्ता न केवल साथी थे, बल्कि महारानी की निजी जिंदगी का एक अटूट हिस्सा और सांत्वना का स्रोत भी थे।
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