आंध्र प्रदेश के एक उपभोक्ता आयोग ने ओला को एक महिला यात्री को ₹50,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है। ड्राइवर उसे एक महत्वपूर्ण न्यायिक परीक्षा के दौरान गलत दिशा में 25 किलोमीटर ले गया और फिर हाईवे पर अकेला छोड़ दिया। आयोग ने कहा कि ओला अपने ड्राइवर के कदाचार के लिए उत्तरदायी है। कंपनी का कर्तव्य है कि वह अपने प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ड्राइवर के इस व्यवहार से महिला यात्री को मानसिक और शारीरिक कष्ट हुआ। आयोग ने इसे सेवा में कमी (डिफिशिएंसी) का मामला माना। ओला को यह राशि मुआवजे और मुकदमे के खर्च के तौर पर देनी होगी। इस फैसले से अन्य ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी सतर्क रहने का संदेश गया है। उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत यह एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
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