NEET का मतलब है ‘नॉट इन एजुकेशन, एम्प्लॉयमेंट, या ट्रेनिंग’। यह उन युवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है जो न पढ़ रहे हैं, न काम कर रहे हैं, न ही कोई प्रशिक्षण ले रहे हैं। ब्रिटेन में वर्तमान में 1.25 मिलियन (12.5 लाख) युवा इस श्रेणी में आते हैं। यह आंकड़ा पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। विशेषज्ञ इसे ‘खोई हुई पीढ़ी’ का संकट कह रहे हैं। इस समस्या के पीछे महामारी, मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ, और कौशल की कमी जैसे कारण हैं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है। लंबे समय तक NEET रहने से युवाओं के भविष्य और आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सरकारें रोजगार और प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से इस समस्या का समाधान ढूंढ रही हैं। लेकिन अभी तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। इससे ब्रिटेन की श्रम शक्ति को दीर्घकालिक नुकसान होने की आशंका है।
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