एक मां की बेटी सुबह सुन्न बांह के साथ उठी, और दो हफ्ते बाद उसकी मौत हो गई। शुरुआत में लक्षण मामूली लगे, लेकिन जांच में ब्रेन ट्यूमर का पता चला। बीमारी इतनी आक्रामक थी कि डॉक्टर कुछ नहीं कर सके। बेटी के जाने के बाद मां टूट गई, लेकिन उसने संकल्प लिया कि उसकी मौत बेकार नहीं जाएगी। वह अब ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूकता फैलाना चाहती हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर पहचान हो जाती, तो शायद उनकी बेटी बच सकती थी। सुन्नपन, सिरदर्द, या दौरे जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह कहानी इस बात की याद दिलाती है कि स्वास्थ्य के मामले में सतर्कता कितनी जरूरी है। मां अब अन्य माता-पिता को इस बीमारी के संकेतों के बारे में बता रही हैं। उनकी बेटी की मृत्यु चिकित्सा जांच की जरूरत और लापरवाही न करने का संदेश देती है। इस दुखद घटना ने परिवार तोड़ा, लेकिन दूसरों को जागरूक करने की प्रेरणा दी। मां चाहती हैं कि किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो। वह कहती हैं कि उनकी बेटी अब भी उनके दिल में जिंदा है। इसलिए वह इस अभियान को अपनी बेटी का असली सम्मान मानती हैं। यह जीवन और मृत्यु के बीच नाजुक लड़ाई की कहानी है।
Source: Source