पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी नाकामी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अंदरूनी विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। इसके जवाब में उन्होंने ‘गिरगिट’ शीर्षक से एक कविता लिखी है। यह कविता विद्रोही नेताओं पर निशाना साधती है और उन पर व्यक्तिगत लाभ के लिए चरित्र बदलने का आरोप लगाती है। ममता ने आगाह किया है कि इस तरह के व्यवहार के गंभीर परिणाम होंगे। यह कविता ऐसे समय में आई है जब कई नेता ‘वीआईपी संस्कृति’ और नेतृत्व की विफलताओं का हवाला देकर अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। पार्टी में बढ़ते विवादों ने पहले से गहराते संकट को और बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर असंतोष के लहर साफ देखी जा सकती है। कविता में ममता ने विद्रोहियों को चेतावनी दी है कि उनकी ‘गिरगिटी’ राजनीति से पार्टी को नुकसान ही होगा। पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्यों ने पिछले कुछ दिनों में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि पार्टी में केंद्रीकृत नेतृत्व और फैसले लेने का गलत तरीका है। ममता के इस कदम को पार्टी के अनुशासन को बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कविता लिखना इस संकट का समाधान नहीं है। पार्टी अब विधानसभा के मानसून सत्र से पहले एकता बहाल करने का प्रयास करेगी। फिलहाल, तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर अटकलें जारी हैं। ममता की कविता ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है।
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