छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में इंडस्ट्रियल डीजल महंगा होने के बाद कंपनियों ने सस्ता डीजल रिटेल पेट्रोल पंपों से खरीदना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बल्क डीजल 160 रुपए प्रति लीटर से अधिक पहुंच गया, जबकि रिटेल डीजल करीब 100 रुपए में मिल रहा है। 60 रुपए के अंतर का फायदा उठाकर कंपनियां अपने आवंटित कंज्यूमर पंपों से डीजल लेना छोड़ रही हैं। इससे सामान्य पंपों पर डीजल की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं को किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि डीजल न मिलने के कारण जिले में 125 बसों का संचालन ठप हो गया है। माल ढुलाई और ट्रांसपोर्ट व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। खाद्य विभाग की समीक्षा में पांच बड़ी औद्योगिक इकाइयों के डीजल उठाव में भारी गिरावट पाई गई। कुछ कंपनियों का उठाव पिछले साल सैकड़ों किलोलीटर से घटकर इस साल शून्य या नगण्य हो गया। इनमें मेसर्स बाहुबली कंस्ट्रक्शन, हिन्दमल्टी सर्विस, क्लीन कोल इंटरप्राइजेज, ईश्वरी मिनरल्स और पारस पावर शामिल हैं। इस पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इन पांचों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके कंज्यूमर पंप का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। डीजल किल्लत के चलते यात्री बसें भी प्रभावित हुई हैं, और ऑपरेटर मनमाने किराये वसूल रहे हैं। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर शासन से ज्ञापन सौंपा है। पिछले 4 सालों से किराए में वृद्धि नहीं हुई है, जबकि डीजल, सुरक्षा उपकरणों और रखरखाव के खर्च बढ़ गए हैं। प्रशासन ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे रिटेल पंपों पर दबाव बढ़ाना जारी रखेंगी तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बिलासपुर में डीजल संकट ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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