

नोइडा में दो राजद spokespeople को पुलिस ने विरोध प्रर्दशन का एक वीडियो साझा करने के बाद भ्रामक सूचना देने का आरोप लगाते हुए बुक किया। इस वीडियो में दिखाए गए झंडे और नारों को वास्तविक विरोध से जोड़कर संभावित ध्रुवीकरण की शंका उठी। जांच के बाद पता चला कि वीडियो पुराना था और वर्तमान प्रदर्शन से अलग था, जिससे जनता में ग़लतफहमी फैल सकती थी। पुलिस ने आरोपियों को ग्रेफ्ट नोटिस जारी किया और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी के प्रसार को रोकने हेतु चेतावनी दी। यह मामला सामाजिक मीडिया पर सूचनाओं की सत्यता जांच की महत्ता को फिर से उजागर करता है, जहाँ झूठी खबरें सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
