

नई दिल्ली (24 अप्रैल) – सेवानिवृत्त राजनयिक और एक दिग्गज लेखक विकास स्वरुप ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के कैडेट्स को एक विशेष शैक्षिक सत्र में “द न्यू वर्ल्ड डिसऑर्डर” पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि परमाणु शस्त्रों के बाद से सबसे बड़ा व्यवधान सूचना‑प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न हो रहा है, जिससे पारम्परिक संकल्पनाएँ धुंधली हो रही हैं। स्वरुप ने कहा, “बहुपोलर विश्व में भारत को अपने रणनीतिक एवं आर्थिक हितों को संतुलित करना होगा, साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर नैतिक नेतृत्व भी प्रदर्शित करना होगा।” उन्होंने कैडेट्स को बहु‑परिदृश्य विश्लेषण, लचीलापन और नैतिकता को अपने पेशेवर जीवन में अपनाने की सलाह दी। व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी कई विदेश यात्राओं के व्यावहारिक अनुभवों को साझा किया, जिससे युवा भविष्य के सैनिकों को जटिल वैश्विक मुद्दों को समझने और उनका सामना करने की दिशा में मार्गदर्शन मिला।
