राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने जनेन्द्रा विश्वविद्यालय (जएनयू) की सामाजिक न्याय की दिशा में गिरावट की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि यहाँ एससी/एसटी छात्रों की enrolment में पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत की उलट बत्ती आई है, जिससे सामाजिक समानता के मूल सिद्धांत पर सवाल उठते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय में 89 प्रोफेसर पदोन्नति मामलों का हवाला दिया, जिनमें से 62 मामलों की प्रगति नियत समय सीमा से काफी आगे निकल गई है। सिंह ने कहा, “ये लंबी देरी न केवल शिक्षक के करियर को ठप्प करती है, बल्कि पीएचडी छात्रों के मार्गदर्शन की क्षमता को भी बाधित करती है।” उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से त्वरित कार्रवाई करने और सभी लंबित मामलों को शीघ्रता से सुलझाने का आग्रह किया, ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता और सामाजिक समावेशिता दोनों में सुधार हो सके।