अप्रैल १ को भारत का रिज़र्व बैंक (RBI) अपनी स्थापना दिवस मनाता है, जो १९३५ में भारतीय रॉयल बैंकिंग कॉम्पिटेन्सी कमेटी के तहत उत्पन्न हुआ था। १५ साल बाद, १९४९ में इसे आजादी के बाद स्वतंत्र भारत का केंद्रीय बैंक घोषित किया गया, जिससे मौद्रिक नीति, बैंकों की निगरानी और मुद्रा जारी करना इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो गया। इस वर्ष RBI ने कई नई पहलें शुरू की हैं: डिजिटल भुगतान को तेज करने के लिए ‘ऑनलाइन पेमेंट्स फ्रेमवर्क’ का विस्तार, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल बैंकिंग शाखाएँ, और फिनटेक इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए ‘फिनटेक सैंडबॉक्स’। साथ ही, सतत विकास के लिए ‘ग्रीन बांड’ प्लेटफ़ॉर्म और जलवायु‑सामंजस्यपूर्ण निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीति भी लागू की गई। रुपये की स्थिरता के लिये RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप, स्वैप लाइन्स के माध्यम से तरलता प्रवाह, और नीति दर में सूक्ष्म समायोजन किया है, जिससे महंगाई को कंट्रोल करने में मदद मिली है। इन कदमों से भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक स्थिर, समावेशी और भविष्य‑सुरक्षित बनाने की दिशा में मजबूत प्रतिबद्धता दिखती है।