परामर्शयुक्त निकाय की सदस्य डॉ. अपर्णा ललिंगकर ने सरकार से सवाल किया है कि ट्रांसजेंडर बिल पर सलाहकार निकाय को क्यों नहीं बुलाया गया। वह कहती हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय की जरूरतों को समझने के लिये विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों की राय आवश्यक थी, परन्तु इस महत्वपूर्ण कानून के मसौदे में उनकी आवाज़ नहीं सुनी गई। ललिंगकर ने स्पष्ट उत्तर मांगा है और कहा कि यदि नीति बनाते समय उचित परामर्श नहीं किया गया तो वह इस बात को चुनौती देगी कि क्या यह बिल वास्तव में ट्रांसजेंडर अधिकारों को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि advisory body को टैक्स एवं सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों में सरकार को सलाह देने के लिये स्थापित किया गया था, फिर भी इस बार उन्हें बाहर रखा गया। ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधि इस कदम को वैधता पर सवाल उठाते हुए, अधिक समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।