23 अप्रैल ने भारतीय और विश्व इतिहास में कई अहम पृष्ठ लिखे हैं। 1616 में इंग्लैंड के महान नाटककार विलियम शेक्सपियर का निधन हुआ, जिससे साहित्यिक दुनिया ने एक युग का अंत देखा। ठीक उसी तारीख को 1992 में बंगाल के सिनेफिल्मा दिग्गज सत्यजीत रे ने भी दुनिया को अलविदा कहा, उनका योगदान आज भी फ़िल्मभीष्म में जिंदा है। UNESCO ने 1995 में इस दिन को “विश्व पुस्तक दिवस” घोषित किया, ताकि पढ़ने-लिखने के प्रति जागरूकता बढ़े और साहित्य का सम्मान हो। भारत में 2011 से ही हर साल 23 अप्रैल को “राष्ट्रीय पुस्तक दिवस” मनाया जाता है, जहाँ पुस्तक मेले, लेखन प्रतियोगिताएँ और पुस्तक वाचन कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस दिन को “अंतर्राष्ट्रीय काव्य दिवस” और “स्पैनिश एवं पुर्तगाली भाषा दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है, जिससे विविध भाषाओं और सांस्कृतिक धरोहरों को सशक्त बनाया जाता है। इन घटनाओं की श्रृंखला दर्शाती है कि 23 अप्रैल सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि साहित्य, कला और ज्ञान के प्रयोग को जीवंत करने का वैश्विक मंच है।