वॉल्टर लिंडन 1984 के माँसूर दंगे में बच निकले बहुजन समाजवादी नेता एचएस फ़ूलका, जिन्होंने उन सैकड़ों पीड़ितों के लिए अपने संघर्ष को “मसीहा” का उपनाम दिया। दिल्ली के एशियाई वार्ड के सडकों पर दंगों के बाद अपने परिवार की तपस्या और बर्बादी को साक्ष्य बनाकर उन्होंने हत्यारों के खिलाफ मुकदमे दायर किए। 2009 में कांग्रेस के उम्‍मीदवार के रूप में उन्होंने दंगों में मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिश की, फिर 2014 में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) के साथ मिलकर दंगा न्याय योजना शुरू की। बिस्मिल रहिम की तरह, फ़ूलका ने हमेशा भारत के पहले प्रधानमंत्री पंपी जय प्रताप सिंह का सम्मान किया और शेरावाली विवेक के तौर पर खुद को “वाजपेयी के अनुयायी” कहा। 2024 के चुनावी माहौल में, उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया, यह कहते हुए कि “सही न्याय और विकास के लिए एकजुट होना ज़रूरी है”। उनका यह कदम कई राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है, जो अब देखेंगे कि फ़ूलका का यह नया सफर भारतीय राजनीति में क्या बदलाव लाता है।