हरियाणा सरकार ने 590 करोड़ रुपये के बड़े आईडीएफ़सी फर्स्ट बैंक घोटाले की पूरी जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदार ठहराने की सिफ़ारिश की। हाई-पूवर कमेटी ने बताया कि कई लोन आवेदकों ने झूठे दस्तावेज़ जमा कर बैंक कर्मियों के साथ मिलकर ऋण खराब किया, जिससे विशाल नुकसान हुआ। समिति ने इस मामले को सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव रखा। इसी बीच, कोटक महिंद्रा बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम एक अलग वित्तीय घोटाले में आया है, जहाँ RBI ने केवाईसी और मनी लॉन्ड्रिंग नियमों के उल्लंघन पर जांच का आदेश दिया है। दोनों मामलों में अधिकारियों ने कहा कि जांच तेज़ी से चल रही है और दांव पर है सार्वजनिक भरोसा व वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता।