
भारतीय डॉलर के मुकाबले रुपये ने 95.00 का ऐतिहासिक स्तर छू लिया, जिससे बाजार में हलचल मच गई। यह रिकॉर्ड इस वजह से बना कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नाइटलाइजर (overnight) बैंकों द्वारा रखे जाने वाले नेट ओपन पोज़िशन की सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक घटा दिया, जिससे शुरुआती ट्रेडिंग में तबीयत मजबूत रही। हालांकि, इस सकारात्मक शुरुआत के बाद रुपये ने समायोजन किया और खुलने के बाद 160 पाईस गिरकर अपनी शुरुआती उछाल को खो दिया। ट्रेडर्स और विश्लेषणकारियों ने यह बदलाव मौद्रिक नीति के सख्त रुख और वैश्विक मुद्रा प्रवाह के प्रभाव के रूप में पढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर RBI अपनी नीति में स्थिरता रखता है तो भविष्य में रुपये को मजबूत करने के अवसर मिल सकते हैं, परन्तु अंतरराष्ट्रीय आर्थिक तनाव और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव पर भी नजर रखनी पड़ेगी।