
दुर्लभ तेल की कीमतें फिर से $115 की छत पार कर गईं, जिससे वैश्विक बाजारों में उछाल आया। इस गिरते मूड के बीच एशिया के शेयरों में निराशा की लहर दौड़ी, क्योंकि अनुशंसित निवेशकों ने जोखिम भरे माहौल को देखते हुए बिचौलियों को बेच दिया। इस बढ़ते तनाव का मुख्य कारण इरान‑समर्थित हूथी विद्रोहियों ने पिछले सप्ताहांत इज़राइल पर अचानक मिसाइल व रॉकेट हमला किया, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध का पाँचवाँ सप्ताह शुरू हो गया। यूएस और यूरोपीय बैंकों ने इस जिम्मेदारी को लेकर सजगता बरती, जबकि तेल आयात‑निर्यात परिदृश्य में अनिश्चितता बढ़ी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हिंसा जारी रही तो तेल की कीमतें और ऊँची जा सकती हैं, जिससे एशिया के अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ेगा। निवेशकों को सावधानी बरतने और संभावित बाजार अस्थिरता के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।