
जम्मू और काशmir सरकार ने पिर पांजल और चेनाब वैली को नया विभागीय दर्जा दिलाने के लिए एक विधेयक पेश किया है। इस कदम के पीछे कई राजनीतिक कारण छिपे हैं। पहले, यह प्रदेश में भाजपा के प्रतिद्वंदियों को कमजोर करने और स्थानीय वोटरों को आकर्षित करने की रणनीति है, क्योंकि नई प्रशासनिक व्यवस्था से रोजगार और विकास परियोजनाओं की आशा बढ़ेगी। दूसरी ओर, अदालतों में चल रहे जल सुरक्षा मुद्दों को देखते हुए, इन क्षेत्रों को विभागीय बनाकर केंद्र सरकार से अधिक फंड और विशेष योजनाओं की मांग मजबूत होगी। आर्थिक दृष्टिकोण से, विभागीय दर्जा मिलने से केंद्र से अतरिक्त 5,000 करोड़ रुपये तक की अनुदान राशि मिलने की संभावना है, जिससे बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार होगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राजकोषीय संतुलन नहीं बनाकर खर्च को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह राज्य की वित्तीय स्थिति को तनावग्रस्त कर सकता है। इस तरह, यह बिल राजनैतिक उद्देश्यों और आर्थिक लाभ दोनों को संतुलित करने की कोशिश में है, जिससे जम्मू और काशmir की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नई दिशा खुल सकती है।